Kajal, 2 weeks ago, 3 min read, 42 Views
ऐतिहासिक झंडा मेला देहरादून 2025 का भव्य शुभारंभ 19 मार्च को श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में हुआ, जहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह उमड़ा। यह मेला हर वर्ष चैत्र मास के पांचवें दिन आयोजित होता है, जो इस बार 19 मार्च को पड़ा। इस बार का मेला 6 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु दरबार साहिब में मत्था टेकने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने आ रहे हैं।
झंडा मेला, जिसे ‘झंडे जी का मेला’ भी कहा जाता है, देहरादून का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इसकी शुरुआत 17वीं शताब्दी में हुई थी, जब श्री गुरु राम राय जी, जो सिख गुरु हर राय जी के पुत्र थे, ने 1676 में देहरादून में दरबार साहिब की स्थापना की थी। उन्होंने यहां एक ध्वज (झंडा) स्थापित किया, जो आज भी श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। तभी से प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें गुरु राम राय जी की शिक्षाओं और उनके योगदान को स्मरण किया जाता है।
मेले का मुख्य आकर्षण ‘झंडा रस्म’ है, जिसमें दरबार साहिब के प्रांगण में एक विशाल ध्वज दंड (झंडा साहिब) को नए कपड़े से सजाया जाता है। यह रस्म विशेष विधि-विधान से संपन्न होती है, जिसमें पहले पुराने कपड़े को उतारा जाता है और फिर नए कपड़े को विशेष मंत्रोच्चारण के साथ चढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
इस वर्ष मेले में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी भक्तों का आगमन हुआ। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के लोग भी इस अवसर पर विशेष रूप से देहरादून आए। श्रद्धालुओं ने दरबार साहिब में मत्था टेका और गुरु महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। शाम के समय कीर्तन, भजन संध्या और धार्मिक प्रवचन आयोजित किए गए, जिनमें स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने भाग लिया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि मेले का संचालन सुचारू रूप से हो सके।
झंडा मेला देहरादून 2025 का आयोजन 6 अप्रैल को संपन्न होगा। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश भी प्रसारित करता है। इस बार भी झंडा मेला देहरादून की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने में सफल रहा और आने वाली पीढ़ियों को इस परंपरा से जोड़ने का कार्य किया।
यह परंपरा 1676 से चली आ रही है जब सातवें सिख गुरु हर राय के सबसे बड़े बेटे गुरु राम राय ने दून घाटी में एक ‘डेरा’ स्थापित किया और इस क्षेत्र का नाम देहरादून रखा। उन्होंने उस स्थान पर झंडा फहराया जिसे अब गुरु राम राय दरबार कहा जाता है, जिससे पवित्र ध्वज-स्तंभ परंपरा की शुरुआत हुई जो आज भी जारी है।
गुरु राम राय जी ने शहर में एक गुरुद्वारा बनवाया जिसे दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। गुरुजी को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल झंडा मेला आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 2025 में मेला 19 मार्च 2025 को शुरू होगा और 06 अप्रैल 2025 को समाप्त होगा।
इतिहास। मंदिर स्थल की स्थापना 17वीं शताब्दी के मध्य में बाबा राम राय ने की थी, जब उन्हें मुगल सम्राट औरंगजेब के सामने आदि ग्रंथ में एक शब्द का गलत अनुवाद करने के कारण रूढ़िवादी सिख संप्रदाय द्वारा निर्वासित कर दिया गया था। उन्होंने अपमान को रोकने के लिए “मुसलमान” शब्द को “विश्वासहीन” से बदल दिया।
देहरादून का झंडा मेला कई दिनों तक चलता है. यह मेला होली के पांचवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को शुरू होता है. यह मेला कई दिनों तक चलता है.
देहरादून का झंडा मेला, जिसे गुरु राम राय दरबार साहिब में हर साल होली के पांचवें दिन आयोजित किया जाता है, इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यह सिख गुरु राम राय के जन्मदिवस और उनकी देहरादून में तपस्थली बनाने की याद में मनाया जाता है, साथ ही यह प्रेम, सद्भाव और आस्था का प्रतीक भी है.
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